Sunday, July 6, 2008

चिड़िया से कहा लड़की ने


चिड़िया से कहा लड़की ने
पंख दोगी मुझे !
उड़ना चाहती हूँ मैं भी
खुले आकाश में
चिड़िया ने कहा
क्यों नहीं , ये लो मेरे पंख
घूम आओ अनंत आकाश में !
सकपका गयी लड़की
बोली- नहीं, नहीं ,
अभी नहीं ले सकती मैं पंख ,
मम्मी डाटेंगी
मैं ठीक हूँ ऐसे ही
फिर भी प्रार्थना करुँगी भगवान् से
अगले जन्म में
पंखों वाली चिड़िया बना दे मुझे !!

3 comments:

umesh kumar said...

अति सुंदर अभिव्यक्ति...शायद यही नारी की नियति है...लेकिन इससे ऊपर उठकर भी सोचना होगा...

Ravindra Das said...

samjha nahin upar uthne ka matlab! meri samajh me yah niyati nahin jagrookta hai.ichchha-yatra vastavik yatra ki bhumika hai.bhai umesh kumar,sthit aur niyti me fark to karna chahiye.aapne ichchha nahin dekhi bas natija dekha. main isase upar to uthna chahta hun,lekin kya vah havaai jaisa nahin ho jayegaa.jawab ki pratiksha me-
aap sabka
ravindra das

महेन said...

चार पंक्तियों में आपने टू द प्वाइंट बात कही है। अवसर का लाभ उठाने के लिये भी सक्षमता होनी ज़रूरी है, मात्र अवसर की उपलब्धि से कुछ नहीं होगा। यह परिस्थितियों से escapisism की अवस्था है और लकीर पीटने की भी अवस्था यही है।
शुभम।