Monday, April 6, 2009

कुछ बात न थी

कुछ बात न थी,
कुछ हुआ नहीं ।
फिर भी थे खफा, मर्जी उनकी
वो कहने लगे -
अब और नहीं।
होगा न गुजर तुम मर्दों से
हम अपनी फिकर ख़ुद कर लेंगे
हम स्त्री, स्त्रीवादी हैं
ख़ुद जी लेंगे , ख़ुद मर लेंगे।
हमने पूछा-
क्या मिलकर हम .....
बकवास न करना आगे से
क्यों साथ तुम्हारा हम लेंगे
हम हिस्सा लेंगे संसद में ......
फिर ?
अपना रास्ता आगे देखो
है बात पुराणी कुछ दिन की
मैं अपना रास्ता देख रहा
और सोच रहा
क्या क्या किस्सा है जुदा-जुदा
मैं कौन हूँ किसके हिस्से का ?
कुछ बात न थी ।



1 comment:

Babli said...

बहुत ही शानदार लिखा है आपने!