Monday, August 11, 2008

कबीर का बंटवारा

होता रहता है,
अक्सर
कबीर दास का सांस्कृतिक बंटवारा
यानि ,
कभी तात्पर्य का
तो कभी विमर्श का
कभी विचार का
तो फिर कभी सत्ता-संघर्ष का।
और ,
इस तरह हो जाता है -
महत्त्वपूर्ण
कबीर से भी अधिक
कबीर का बंटवारा ।

1 comment:

bahadur patel said...

darasal yah kavita na hokar ek jumala-sa ho gaya hai jo philhal achchha lag raha hai.