Monday, May 17, 2010

बिल्ली आई

बिल्ली आई
बिल्ली आई
जैसे रोज चली आती है, आज भी आई।

उसे पता चल चुका, सयाने
चूहे अब हैं हाथ न आने
चाहे कितने करे बहाने
चूहे भी इतने मनमाने ?
हरकत - करतब देख देख कर
चूहों की बिल्ली खिसियाई
देखो देखो बिल्ली आई।

बिल्ली ने तरकीब लगाई
राजनीति की जुगत भिड़ाई
चूहों से बस हाथ जोड़कर
एक वोट की करे दुहाई
दांव पेंच से एम पी बनकर
मौसी अबकी दिल्ली आई।

बिल्ली ने फिर दांव लगाया
सब चूहों को पास बुलाया
सबको दिया प्रगति का नारा
मिलकर देखो काम हमारा
बिल्ली की थी जात अलग, सो
बात किसी को समझ न आई।

3 comments:

भास्कर said...

इसी नासमझी की वजह से बिल्ली के अस्तित्व को कोई खतरा नहीं है।

हिमांशु । Himanshu said...

खूबसूरत !

रवीन्द्र दास said...

Himanshu bhai,
kaun khubsurat! billi, chuhe, kavita yaa main? haa- haa - haa -....