Monday, September 26, 2011

तुम्हारे प्यार में

जब
मेरे शब्द
नाचने लगे थे
तेरे इशारों पर
मेरी सांसें
घबराने लगी थीं
तेरी हरकतों पर
मेरी सुबह
तय होने लगी थीं
तेरे मुस्कुराने पर...
..........
तभी अहसास हुआ
कि मैं तुम्हारे प्यार में हूँ !

5 comments:

Rajesh Kumari said...

khoob surat bhaavon ki abhivyakti.very nice.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

mridula pradhan said...

chu-mui si....behad pyari.

अनामिका की सदायें ...... said...

chalo aachha hua pata chal gaya...varna sochte ki mausam ka badlaav hai.

:)

sunder prastuti.

Onkar said...

gagar mein sagar. Reshami si kavita.