Friday, March 2, 2012

फ़र्क

तुम्हारे चेहरे
और तुम्हारे अल्फ़ाज़ में
जो फ़र्क है
उसी फ़ासले में कहीं
एक कविता रहती है
जो अक्सर लोगों को लगती है
गलत
और मुझे खूबसूरत
तुम्हारे चेहरे
और अल्फ़ाज़ में जो फ़र्क है
यकीनन
बेमिसाल है ...

4 comments:

Dr.Nidhi Tandon said...

लोगों के लगने की क्या परवाह.....करना.

Onkar said...

sundar panktiyan

babbar.R said...

umda, vo kehte hain na chehre jhooth bolte hain, aur ye bhi zaroori nahi ke jo alfaaz hum bol rahe hon usmein hamaara dil saath de raha ho to yaqeen to un alfaazon per bhi nahi kiya ja sakta, humm bahut khoob Mr. Das

दिगम्बर नासवा said...

वाह क्या कहने ... कविता की उत्पति ...